00:04:17 साधु ने कोई उत्तर नहीं दिया वह चुपचाप बैठे रहे जैसे उनके आसपास की घटनाओं का उन पर कोई असर ही नहीं हो रहा था यह चुप्पी इंस्पेक्टर के लिए और भी असहनीय हो रही थी इंस्पेक्टर के दिमाग में महाकुंभ में घटी घटनाओं की तस्वीरें घूमने लगी सुबह ही उन्हें सूचना मिली थी कि एक अघोरी साधु लोगों को ठग रहा है कई तीर्थ यात्रियों ने शिकायत की थी कि भैरवनाथ नामक यह साधु पूजा पाठ और गंगा स्नान के नाम पर लोगों से धन और गहने ले रहा है कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने बच्चों के इलाज के लिए इस साधु को बड़ी रकम दी लेकिन बदले में केवल राख और माला थमा दी गई एक व्यक्ति ने यह भी दावा किया था कि साधु ने उसे अमीर
00:04:52 बनाने का झांसा देकर उसकी संपत्ति हड़पने की कोशिश की इन सब शिकायतों के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और साथ साधू को गिरफ्तार करने घाट पर पहुंची साधु को मुख्य काल कोठरी में डाल दिया गया जहां अंधेरा और सर्द था लोहे की मोटी सलाखें और दीवारों पर जमी काई उस जगह की दुर्दशा बयान कर रही थी साधु ने कोठरी के भीतर प्रवेश करते ही अपनी आंखें बंद कर ली और एक कोने में बैठ गए जेल के अन्य कैदी उन्हें अजीब नजरों से देख रहे थे कुछ लोग फुसफुसाना होती हैं कहीं यह हमारे लिए मुसीबत ना बन जाए पुलिस स्टेशन के अधिकारी
00:05:29 भी भैरवनाथ कोले लेकर संशय में थे इंस्पेक्टर राठौड़ ने अपने अधीनस्थों से कहा चाहे कुछ भी हो मुझे इस आदमी का सच उगलवाने परेशान कर रही है भैरवनाथ ने कोई विरोध नहीं किया उन्होंने अपनी आंखें मूंद ली और गहरे ध्यान में लीन हो गए जेल के भीतर अचानक एक अजीब सी हलचल होने लगी ऐसा लग रहा था जैसे समय थम गया हो पुलिस कर्मी जो अक्सर कठोर और निष्ठुर रहते थे अचानक साधु को लेकर असमंजस में आ गए उनमें से कुछ ने धीरे-धीरे यह महसूस करना शुरू कर दिया कि भैरवनाथ की उपस्थिति में कुछ अद्भुत और रहस्यमई है जेल में एक विचित्र
00:06:07 घटना घटी कोठरी के पास ड्यूटी कर रहे सिपाही ने देखा कि साधु के चारों ओर हल्का प्रकाश फैलने लगा उसने इसे अपनी आंखों का भ्रम समझा और नजरअंदाज कर दिया लेकिन जल्द ही पूरे जेल में एक अजीब सी शांति छा गई कैदियों के चिल्लाने और झगड़ने की आवाजें जो आमतौर पर रात में सुनाई देती थी पूरी तरह बंद हो गई कुछ कैदियों ने दावा किया कि उन्होंने साधु को कोठरी के अंदर ध्यान करते समय हवा में तैरते हुए देखा पुलिस अधिकारी इस पर यकीन नहीं कर सके लेकिन वे भी कुछ असामान्य अनुभव कर रहे थे महाकुंभ में साधु की गिरफ्तारी के बाद यह खबर तेजी
00:06:43 से फैल गई लोग अब पुलिस के इस कदम पर सवाल उठाने लगे थे कई श्रद्धालु मानते थे कि भैरवनाथ ठग नहीं हो सकते उन्होंने हमसे कुछ भी नहीं मांगा एक महिला ने मीडिया को बताया वह तो केवल भगवान शिव के नाम का जाप कर रहे थे अगर वह ठग होते तो उनके पास बड़ी दौलत होती दूसरी ओर कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई का समर्थन कर रहे थे अगर वह निर्दोष हैं तो यह साबित होगा एक आदमी ने कहा जेल में भैरवनाथ के शांत और स्थिर व्यवहार ने इंस्पेक्टर राठौड़ के मन में गहरी जिज्ञासा पैदा कर दी वह अब सोचने लगा कि कहीं वह गलत तो नहीं है अगर यह आदमी
00:07:17 वास्तव में ठग है तो यह इतनी शांति से कैसे रह सकता है उन्होंने अपने एक सहकर्मी से कहा यह इंसान दूसरों से अलग है हमें इसके बारे में और गहराई से पता लगाना होगा जेल की कालकोठरी अं अंधकार और सन्नाटे से भरी हुई थी वहां की दीवारें जिन पर समय और नमी ने अपनी छाप छोड़ दी थी ठंड और वीरान गी का अनुभव कराती थी भैरवनाथ को यहां बंद करने का निर्णय इंस्पेक्टर राठौड़ ने इसलिए लिया था ताकि वह मानसिक और शारीरिक रूप से टूट जाए और सच्चाई स्वीकार कर लें रात का समय था जेल के सभी कैदी अपने-अपने कोनों में दुबके हुए थे अघोरी भैरवनाथ
00:07:53 अपने कोने में ध्यान मग्न बैठे थे उनकी उपस्थिति जो किसी को शांत कर सकती थी वहीं जेल के अध अधिकारियों और कैदियों के लिए बेचैनी का कारण बन रही थी काल कोठरी में घना अंधेरा था केवल एक छोटी सी खिड़की से चांद की हल्की रोशनी अंदर आती थी लेकिन वह भी अंधेरे को चीरने में असमर्थ थी कोठरी के आसपास अजीब सी सरसराहट सुनाई दे रही थी जैसे वहां कोई अदृश्य ताकत मौजूद हो कोठरी के अन्य कैदी फुसफुसाना मैंने सुना है कि अघोरी के पास अलौकिक शक्तियां होती हैं लेकिन यह यहां क्यों है कहीं ऐसा ना हो कि वह हम पर कोई तांत्रिक क्रिया कर दे इन बातों के बीच
00:08:35 भैरवनाथ शांत थे वह अपने त्रिपुंड ललाट और गले में पड़ी नरमुंड माला के साथ बिल्कुल अचल बैठे थे ऐसा लगता था जैसे वह खुद को इस संसार से अलग कर चुके हो पहला संकेत आधी रात के करीब कोठरी के पास तैनात एक सिपाही को हलचल महसूस हुई उसने देखा कि कोठरी के अंदर का माहौल बदल रहा था वहां हल्की-हल्की गूंज सुनाई दे रही थी यह गूंज किसी मंत्र की तरह लग रही थी सिपाही ने डरते हुए अपने साथी से कहा क्या तुमने यह आवाज सुनी लेकिन उसके साथी ने कुछ नहीं सुना सिपाही ने साहस जुटाकर कोठरी की ओर देखा उसने देखा कि भैरवनाथ के चारों ओर एक
00:09:11 हल्का प्रकाश फैलने लगा है कोठरी की अंधेरी दीवारें उस प्रकाश से चमकने लगी साधु गहरे ध्यान में लीन थे उनकी आंखें बंद थी लेकिन उनकी उपस्थिति इतनी प्रबल थी कि जेल की दीवारें तक उनकी ऊर्जा को महसूस कर रही थी उनके चारों ओर बहने वाली अदृश्य ऊर्जा ने वहां के माहौल को बदल दिया था जेल के दूसरे कैदियों ने भी यह महसूस किया एक कैदी जो कई सालों से जेल में बंद था और अपने क्रूर स्वभाव के लिए जाना जाता था पहली बार शांत हो गया उसने कहा मुझे नहीं पता यह आदमी कौन है लेकिन यह साधारण इंसान नहीं हो सकता इंस्पेक्टर राठौड़ की बेचैनी
00:09:49 राठौड़ अपने कार्यालय में बैठा था लेकिन उसका ध्यान बार-बार कालकोठरी की ओर जा रहा था उसने अपने सहायक से कहा मुझे समझ में नहीं आता कि यह आदमी इतना शांत क्यों है कोई तो कारण होगा क्या पता यह ठग हो या इससे भी कुछ बड़ा राठौड़ ने खुद जाकर कोठरी का मुआयना करने का निश्चय किया जैसे ही वह कोठरी के पास पहुंचे उन्होंने साधु के चारों ओर फैले उस हलके प्रकाश को देखा राठौड़ ठिठक गए उन्हें ऐसा लगा जैसे वह उस साधु की ऊर्जा से खींचते जा रहे हो राठौड़ ने अपनी हिम्मत जुटाकर भैरवनाथ से पूछा तुम कौन हो क्या सच में तुम ठग हो या यह
00:10:27 सब कोई चाल है भैरवनाथ ने धीरे-धीरे धीरे अपनी आंखें खोली उनकी आंखों में एक अद्भुत चमक थी वह बोले मैं वही हूं जो सबके भीतर है तुम मुझसे जो प्रश्न कर रहे हो उसका उत्तर अपने भीतर खोजो राठौड़ इस उत्तर से असमंजस में पड़ गए उन्होंने साधु से और सवाल करने की कोशिश की लेकिन वह फिर से ध्यान में लीन हो गए रात और गहरी हो चुकी थी जेल के सभी कैदी सो चुके थे लेकिन कालकोठरी के पास खड़ा सिपाही अब भी बेचैन था अचानक जेल के अंदर एक जोर की आवाज हुई ऐसा लगा जैसे दीवारों के पीछ पछे कुछ गिरा हो सिपाही दौड़कर राठौड़ के पास पहुंचा और
00:11:03 कहा सर वहां कुछ अजीब हो रहा है कोठरी के अंदर से तेज आवाजें आ रही हैं राठौड़ और अन्य अधिकारी तुरंत कोठरी के पास पहुंचे वहां उन्होंने देखा कि कोठरी की सलाखें अपने आप हिल रही थी अंदर भैरवनाथ के चारों ओर तेज रोशनी फैल रही थी ऐसा लगा जैसे कोठरी में कोई अदृश्य शक्ति काम कर रही हो जेल के सभी कैदी अब जाग चुके थे वे भयभीत होकर कोठरी की ओर देख रहे थे कुछ कैदी जो साधु के बारे में नकारात्मक सोचते थे अब उनके चरणों में गिरने को तैयार थे यह कोई साधारण इंसान नहीं है एक कैदी ने कहा क्या यह भगवान शिव का अवतार है दूसरे ने पूछा
00:11:39 रात का गहराता अंधकार जेल पर छा गया था सन्नाटा इतना गहरा था कि केवल हवा की सरसराहट और दूर कहीं जलती लालटेन की मध्यम टिमटिमाते रही थी लेकिन जेल के अंदर विशेष रूप से काल कोठरी के पास माहौल असामान्य था अघोरी भैरवनाथ ध्यान में लीन थे उनके चारों ओर एक अदृश्य शक्ति का प्रवाह महसूस किया जा सकता था जेल के अन्य कैदी और सिपाही जो अब तक साधारण इंसान की तरह व्यवहार कर रहे थे इस स्थिति को देखकर विचलित हो रहे थे काल कोठरी में पहला बड़ा चमत्कार आधी रात बीत चुकी थी जेल के सभी कर्मचारी और कैदी सोने का प्रयास कर रहे
00:12:17 थे लेकिन कोठरी के पास खड़ा सिपाही रह-रह कर बेचैन महसूस कर रहा था उसने देखा कि कोठरी के अंदर से हल्की रोशनी फैल रही थी यह रोशनी पहले पीली थी फिर धीरे-धीरे सुनहरी और फिर सफेद हो गई सिपाही ने सहमे हुए इंस्पेक्टर राठौड़ को बुलाने का फैसला किया सर आप जल्दी आइए कोठरी में कुछ अजीब हो रहा है राठौड़ जो पहले से ही अघोरी की उपस्थिति को लेकर विचलित थे तुरंत अपनी कुर्सी छोड़कर वहां पहुंचे कोठरी के पास पहुंचते ही राठौड़ ने देखा कि भैरवनाथ के चारों ओर तेज प्रकाश का एक वृत्त बन चुका था साधु की आंखें अब भी बंद थी लेकिन उनकी
00:12:52 उपस्थिति का प्रभाव पूरे वातावरण पर साफ दिखाई दे रहा था जेल के अन्य कैदी जो पहले झगड़ालू और हिंसक थे अब शांत हो गए थे उनमें से कई साधु की ओर ध्यान मग्न होकर देख रहे थे एक कैदी जिसने पहले कई बार जेल के नियम तोड़े थे फूट-फूट कर रोने लगा मैंने अपने जीवन में कई पाप किए हैं उसने कहा मुझे लगता है कि यह साधु मुझे देख रहा है मेरी आत्मा को राठौड़ का पहला बड़ा संदेह इंस्पेक्टर राठौड़ जो अपने कड़े व्यवहार के लिए जाने जाते थे इस घटना को देखकर विचलित हो गए उन्होंने खुद से कहा यह आदमी क्या है क्या यह वाकई ठग हो सकता
00:13:29 है या हमारे सामने कुछ ऐसा है जो हमारी समझ से परे है उन्होंने साधु से पूछा यह सब क्या हो रहा है तुमने ऐसा क्या किया कि यह कोठरी भी तुम्हारी शक्ति से भर गई है साधु ने धीरे से आंखें खोली उनकी आंखों में गहराई और शांति थी उन्होंने कहा जो तुम देख रहे हो वह तुम्हारे भीतर का ही प्रतिबिंब है डर तुम्हारी कल्पना है और जो प्रकाश तुम्हें दिख रहा है वह सत्य है रात के तीसरे पहर एक असाधारण घटना घटी कोठरी का भारी लोहे का दरवाज जिसे कई ताले लगाकर बंद किया गया था अचानक जोर की आवाज के साथ खुल गया यह देख सभी सिपाही और कैदी हक के
00:14:07 बक्के रह गए यह कैसे हुआ राठौड़ ने गुस्से और डर के मिश्रण में चिल्लाते हुए कहा साधु अपनी जगह शांत बैठे रहे उन्होंने कोई हरकत नहीं की उन्होंने कहा जो बंद है वह खोला जा सकता है और जो खोला गया है वह केवल सत्य का मार्ग दिखाने के लिए है साधु के शब्दों के साथ ही जेल के भीतर एक अजीब सा दिव्य वातावरण बन गया ऐसा मैं महसूस हो रहा था जैसे जेल अब केवल पत्थरों और लोहे की इमारत नहीं बल्कि किसी तीर्थ स्थान में बदल गई हो जेल में मौजूद कैदियों और सिपाहियों ने महसूस किया कि उनकी परेशानियां गुस्सा और भय सब धीरे-धीरे
00:14:43 शांत हो रहे हैं एक कैदी जो वर्षों से बीमारी से पीड़ित था उसने कहा मेरे सीने का दर्द अचानक गायब हो गया यह कैसे हो सकता है साधु ने अपनी शांत लेकिन गहरी आवाज में कहा यह संसार ऊर्जा का केंद्र है जब तुम इस ऊर्जा को समझते हो हो तो सब कुछ स्पष्ट हो जाता है मेरी उपस्थिति यहां कोई दुर्घटना नहीं है मैं यहां तुम्हारे भीतर की उस शक्ति को जगाने आया हूं जिसे तुमने अनदेखा कर दिया है राठौड़ जो अब तक साधु को केवल एक ठग मानते थे इस घटना के बाद चुप हो गए उन्होंने पहली बार महसूस किया कि यह साधु साधारण नहीं है जेल का माहौल
00:15:19 अब पूरी तरह बदल चुका था हर कोई अगली रात की प्रतीक्षा करने लगा सिपाही जो पहले साधु को लेकर शंक थे अब उनके करीब जाने से डरने लगे थे कैद जो पहले उनका मजाक उड़ाते थे अब उन्हें श्रद्धा की नजरों से देख रहे थे राठौर ने अपने सहकर्मियों को बुलाकर कहा इस आदमी के बारे में और जानकारी जुटा मुझे इसके अतीत के बारे में सब कुछ पता करना है मुझे यह जानना होगा कि यह आदमी कौन है और यह सब कैसे कर रहा है जेल के भीतर फैले दिव्य माहौल ने सभी को बदल दिया था कैदियों सिपाहियों और यहां तक कि इंस्पेक्टर राठौड़ के दिल में भी अब साधु
00:15:55 भैरवनाथ के प्रति जिज्ञासा और श्रद्धा का भाव उत्पन्न हो गया था लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न अब भी अनुत्तरित था भैरवनाथ कौन हैं और उनके पास यह अद्भुत शक्तियां कहां से आई राठौड़ ने साधु के अतीत के बारे में अधिक जानने का निश्चय किया उन्होंने अपने सहायक को आदेश दिया जाओ महाकुंभ में और उसके आसपास इस व्यक्ति के बारे में सारी जानकारी जुटा यह जानना बहुत जरूरी है कि भैरवनाथ आखिर किसके आदेश से यहां हैं साधु जो अब भी कोठरी में ध्यान मग्न बैठे थे अपने भीतर के सफर पर निकल चुके थे इस ध्यान के दौरान उनके अतीत की झलकियां
00:16:31 प्रकट हुई भैरवनाथ एक छोटे से गांव में पैदा हुए थे बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्म की ओर था वह घंटों जंगल में अकेले बैठकर ध्यान करते थे गांव वाले उन्हें अजीब समझते थे लेकिन उनके भीतर की शांति और दृढ़ता ने उन्हें हमेशा विशेष बना दिया एक दिन एक रहस्यमई साधु उनके गांव आए उस साधु ने भैरवनाथ को पहचान लिया और कहा तुम कोई साधारण बालक नहीं हो तुम्हारे भीतर कुछ ऐसा है जो पूरे संसार को बदलने की क्षमता रखता है तुम्हें भगवान शिव के मार्ग पर चलना होगा उस दिन से भैरवनाथ ने साधु के साथ हिमालय की यात्रा शुरू की वहां उन्होंने कठिन तपस्या की
00:17:08 हिमालय की कठोर ठंड में उन्होंने केवल राख और जड़ी बूटियों पर निर्वाह किया उनकी साधना ने उन्हें अलौकिक शक्तियां प्रदान की लेकिन यह सब उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपने पूर्ण समर्पण और सेवा के लिए किया हिमालय में एक गुफा के भीतर उन्होंने लगातार कई वर्षों तक तपस्या की उनकी आराधना इतनी गहन थी कि भगवान शिव स्वयं उनके सामने प्रकट हुए भैरवनाथ भगवान शिव ने कहा तुमने जो साधना की है वह केवल तुम्हारे लिए नहीं है यह संसार की भलाई के लिए है तुम मेरे मार्गदर्शक बनोगे और उन लोगों को रास्ता दिखाओगे जो अंधकार में
00:17:43 भटक रहे हैं लेकिन याद रखना यह मार्ग कठिन होगा भगवान शिव ने उन्हें कई शक्तियां प्रदान की और एक वरदान दिया जब भी भैरवनाथ को मानवता के कल्याण के लिए उनकी आवश्यकता होगी शिव स्वयं उनके साथ होंगे भैरवनाथ के अतीत का य यह अद्भुत रहस्य धीरे-धीरे राठौड़ और अन्य जेल कर्मचारियों के समक्ष खुलने लगा राठौड़ के सहायक ने महाकुंभ में साधु के बारे में छानबीन की और पता लगाया कि भैरवनाथ पिछले 10 वर्षों से महाकुंभ के हर आयोजन में उपस्थित होते हैं लेकिन उन्होंने कभी किसी से कुछ नहीं मांगा लोग कहते हैं कि वह केवल शिव की पूजा करते हैं
00:18:21 और उन लोगों की मदद करते हैं जो सच्चे दिल से उनके पास आते हैं सहायक ने कहा उन पर ठगी का आरोप लगाने वाली महिलाएं खुद अब यह मानने लगी हैं कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया शायद हमने गलती की है उस रात जेल में एक और रहस्यमई घटना घटी साधु भैरवनाथ ध्यान में बैठे थे और अचानक जेल के अंदर एक दिव्य सुगंध फैल गई कैदियों और सिपाहियों को ऐसा लगा जैसे वे किसी तीर्थ स्थल पर पहुंच गए हो राठौड़ ने देखा कि भैरवनाथ के चारों ओर एक अद्भुत प्रकाश फैल गया है उन्हें भगवान शिव की छवि दिखाई दी जो साधु के पीछे खड़ी थी यह दर्शन क्षणिक
00:18:56 था लेकिन इतना प्रभावशाली था कि राठौड़ अब पूरी तरह समझ चुके थे कि भैरवनाथ साधारण इंसान नहीं है अगली सुबह इंस्पेक्टर राठौड़ ने भैरवनाथ के सामने जाकर कहा मैंने जीवन भर नियमों और कानूनों का पालन किया है मैंने हमेशा यही माना है कि दुनिया में अच्छाई और बुराई के बीच केवल कानून की रेखा खींची जा सकती है लेकिन आप मुझे एक नई सच्चाई दिखा रहे हैं क्या आप मुझे बता सकते हैं कि आप यहां क्यों आए हैं भैरवनाथ ने गहरी सांस ली और बोले मैं यहां इसलिए आया हूं क्योंकि यह मेरे मार्ग का का हिस्सा है मैं यहां किसी के आदेश पर
00:19:31 नहीं बल्कि अपने कर्तव्य के लिए आया हूं भगवान शिव ने मुझे यह शक्ति इसलिए दी है ताकि मैं उन लोगों को राह दिखा सकूं जो अंधकार में खो चुके हैं तुम भी इस सत्य को स्वीकारो राठौड़ यह शक्ति तुम्हारे भीतर भी है भैरवनाथ की शक्तियों और उनके दिव्य व्यक्तित्व के सामने अब तक जेल में जो भी संशय था वह धीरे-धीरे मिटने लगा पुलिस कर्मियों और कैदियों के दिल में उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव पैदा होने लगा था जेल में कैदियों का व्यवहार आश्चर्यजनक रूप से बदलने लगा जहां पहले कैदी एक दूसरे से झगड़ते रहते थे अब वहीं
00:20:06 कैदी शांत हो गए थे कुछ कैदी तो ध्यान लगाने लगे थे राठौड़ ने यह परिवर्तन देखकर कहा यह आदमी कोई साधारण इंसान नहीं है इसकी उपस्थिति ने जेल का माहौल ही बदल दिया है एक रात जब जेल के सभी कैदी सो रहे थे तभी अचानक पूरे जेल में घंटियों की आवाज गूंजने लगी यह आवाज इतनी मधुर थी कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया कैदियों और पुलिस कर्मियों ने देखा कि भैरवनाथ के चारों ओर फिर से तेज प्रकाश फैल गया इस बार प्रकाश इतना प्रबल था कि जेल की दीवारें तक सुनहरी दिखने लगी अगली सुबह राठौड़ ने भैरवनाथ से पूछा आपने यह सब कैसे किया यह सब क्या दर्शाता है भैरवनाथ
00:20:45 ने मुस्कुराते हुए कहा यह केवल प्रारंभ है हर आत्मा के भीतर यह शक्ति है यह तुम पर निर्भर करता है कि तुम इसे कैसे जागृत करते हो राठौड़ जो हमेशा एक कट्टर पुलिस अधिकारी थे अब अपने भीतर बदलाव महसूस कर रहे थे उन्हें महसूस हुआ कि वह एक बड़े सत्य के सामने खड़े हैं जिसे वह अब तक नजरअंदाज करते आए थे भैरवनाथ की रहस्यमई शक्तियों और जेल में हुए परिवर्तन की खबरें जेल के बाहर फैलने लगी कई लोग जो पहले उनके विरोधी थे अब उन्हें भगवान का रूप मानने लगे इसी बीच एक महिला जेल पहुंची उसकी उम्र करीब 50 वर्ष थी और उसके चेहरे पर गहरी चिंता झलक रही थी उसने जेल
00:21:23 अधिकारियों से कहा मुझे भैरवनाथ से मिलना है मुझे उनके खिलाफ गवाही देनी है लेकिन यह गवाही सब कुछ बदल सकती है राठौड़ ने महिला को भीतर बुलाया उसने कहा मेरा नाम सावित्री है मैं वही हूं जिसने पहले भैरवनाथ पर ठगी का आरोप लगाया था लेकिन मैं अब सच बताना चाहती हूं सावित्री ने बताया कि उसके बेटे की हालत बहुत खराब थी डॉक्टरों ने उसे जवाब दे दिया था तब उसने भैरवनाथ से मदद मांगी थी भैरवनाथ ने उसके बेटे को केवल भस्म दी और कहा कि उसे विश्वास रखना होगा मेरे बेटे का इलाज किसी डॉक्टर ने नहीं बल्कि उनके दिए हुए भस्म
00:21:59 ने किया सावित्री ने कहा मुझे लगा था कि यह सब उनका चमत्कार नहीं बल्कि एक संयोग था इसलिए मैंने उन पर ठगी का आरोप लगाया लेकिन अब मुझे समझ में आया कि यह सब भगवान शिव की कृपा थी जो उनके माध्यम से मेरे बेटे तक पहुंची सावित्री की गवाही सुनने के बाद राठौड़ और अन्य अधिकारी हैरान रह गए राठौड़ ने भैरवनाथ से पूछा आपने इस बारे में पहले क्यों कुछ नहीं कहा भैरवनाथ ने शांत स्वर में उत्तर दिया सत्य को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती समय पर पर वह स्वयं प्रकट हो जाता है भैरवनाथ की सत्यता अब स्पष्ट हो चुकी थी लेकिन यह अंत
00:22:34 नहीं था जेल से उनकी रिहाई का आदेश आ चुका था परंतु इसके साथ ही समाज और धर्म के प्रति उनके कर्तव्यों की अग्नि प्रीक्षा भी शुरू होने वाली थी जब भैरवनाथ को जेल से बाहर लाया गया तो बाहर एक विशाल भीड़ उनका इंतजार कर रही थी कुछ उनके समर्थक थे तो कुछ आलोचक लोगों के मन में कई सवाल थे क्या यह साधु सचमुच दिव्य शक्तियों का धनी है या यह सब दिखावा है जेल के बाद हर एक प्रभावशाली धार्मिक नेता ने भैरवनाथ को चुनौती दी यदि तुम सच में भगवान शिव के भक्त हो और उनकी कृपा तुम पर है तो इसे सिद्ध करो हमारे समाज में बहुत अन्याय हो
00:23:10 रहा है अगर तुम्हारे पास सचमुच कोई शक्ति है तो इसे समाज के कल्याण के लिए उपयोग करो भैरवनाथ ने शांत स्वर में कहा शक्ति का प्रदर्शन करना उसका अपमान है लेकिन यदि यह समाज के हित के लिए है तो मैं इस चुनौती को स्वीकार करता हूं पहली चुनौती के रूप में भैरवनाथ को एक गरीब गांव में ले जाया गया जहां एक गंभीर महामारी फैली हुई थी गांव वालों ने उनसे मदद की गुहार लगाई भैरवनाथ ने गांव में प्रवेश किया और अपनी साधना से जल को औषधि में परिवर्तित किया उन्होंने इसे पीने का निर्देश दिया कुछ ही दिनों में गांव में सुधार होने लगा
00:23:46 इस घटना ने भैरवनाथ के प्रति जनता की आस्था को और भी मजबूत कर दिया लोग उन्हें अब केवल एक साधु नहीं बल्कि भगवान शिव का दूत मानने लगे गांव में अपनी पहली परीक्षा के सफलता पूर्वक पूर्ण होने के बाद बाद भैरवनाथ ने महाकुंभ की ओर लौटने का निश्चय किया अब यह वापसी केवल उनके लिए नहीं थी बल्कि उन हजारों लोगों के लिए एक नई आशा का प्रतीक बन चुकी थी जो उनका अनुसरण कर रहे थे जैसे ही भैरवनाथ महाकुंभ की ओर बढ़े उनके पीछे-पीछे चलने वाले अनुयायियों का एक विशाल कारवा बन गया इन अनुयायियों में वे लोग थे जो उनकी चमत्कारी शक्तियों
00:24:21 के साक्षी बने थे और वे भी जिन्होंने उनके उपदेशों से अपने जीवन में बदलाव महसूस किया था हर हर महादेव के नारों से गूंजता यह कारवां भक्ति और श्रद्धा का एक जीवंत उदाहरण था महाकुंभ में लौटते ही भैरवनाथ की उपस्थिति ने पूरे मेले के माहौल को बदल दिया साधु संतों की सभा में उनका स्वागत हुआ अनेक धर्म गुरुओं ने उन्हें आमंत्रित किया और उनके साथ संवाद किया भैरवनाथ ने एक बड़े मंच से जनता को संबोधित किया उन्होंने कहा शक्ति और साधना का उपयोग केवल स्वयं की उन्नति के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए यह
00:24:58 मानवता का परम धर्म है भगवान शिव का मार्ग भी यही सिखाता है महाकुंभ में उनकी शिक्षाओं ने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया भैरवनाथ ने गंगा तट पर एक विशेष अनुष्ठान किया जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया यह अनुष्ठान केवल आध्यात्मिक शुद्धि के लिए नहीं बल्कि समाज को नई दिशा देने के लिए था महाकुंभ के समापन के साथ ही भैरवनाथ ने संकेत दिया कि उनकी यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है उन्होंने कहा यह केवल आरंभ है जब तक तक संसार में अज्ञान अन्याय और पीड़ा है तब तक मेरा कर्तव्य समाप्त नहीं होगा मैं उन
00:25:34 सभी स्थानों पर जाऊंगा जहां भगवान शिव की कृपा की आवश्यकता है महाकुंभ के समापन के बाद भैरवनाथ ने अपनी यात्रा जारी रखी अब उनके अनुयायियों का समूह इतना बड़ा हो चुका था कि इसे रोक पाना असंभव था लेकिन उनके सामने एक आखिरी चुनौती बाकी थी यह चुनौती केवल उनके लिए नहीं बल्कि मानवता के लिए एक परीक्षा थी भैरवनाथ ने घोषणा की कि वह गंगा के तट पर एक अंतिम अनु अनुष्ठान करेंगे यह अनुष्ठान केवल एक साधारण धार्मिक क्रिया नहीं थी बल्कि इसका उद्देश्य संसार के सभी अंधकार को समाप्त करना था गंगा के तट पर लाखों लोग इकट्ठा
00:26:09 हुए अनुष्ठान की शुरुआत के साथ ही वातावरण में एक गहन शांति छा गई भैरवनाथ ने भगवान शिव का आह्वान किया और तभी आसमान में घने बादल छा गए बिजली की गड़गड़ाहट के बीच एक दिव्य प्रकाश उनके चारों ओर फैलने लगा अनुष्ठान के दौरान भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर रनाथ को आशीर्वाद दिया उन्होंने कहा तुमने अपनी साधना और कर्तव्य से यह सिद्ध कर दिया है कि तुम मेरे सच्चे अनुयाई हो तुमने जो किया है वह केवल एक साधु के रूप में नहीं बल्कि मानवता के मार्गदर्शक के रूप में किया है अब समय आ गया है कि तुम अपने असली स्वरूप को समझो
00:26:47 भैरवनाथ ने शिव से पूछा भगवान क्या मैं आपका अवतार हूं भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा तुम मेरे अवतार नहीं बल्कि मेरे संदेशवाहक हो हर इंसान में मेरा अंश है और तुमने इसे जागृत कर दिखाया है यही तुम्हारा सत्य है भगवान शिव के प्रकट होने और उनके आशीर्वाद के बाद भैरवनाथ ने अपने अनुयायियों को संबोधित किया उन्होंने कहा हम सभी में दिव्यता है भगवान शिव हर जगह हैं और हम सभी उनके अंश हैं यह संसार हमारा कर्तव्य है और इसे हम केवल अपने कर्मों से सुधार सकते हैं इस अनुष्ठान के बाद भैरवनाथ ने अपने अनुयायियों से विदा
00:27:25 ली उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हर इंसान अपने भीतर की शक्ति को पहचानकर संसार को बेहतर बनाए उनकी विदाई ने लोगों के दिलों में एक गहरा प्रभाव छोड़ा भैरवनाथ की यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची शक्ति भीतर होती है उनका जीवन मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया उनकी शिक्षाएं और कर्म आज भी लाखों लोगों के दिलों में जीवित हैं यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अज्ञान अन्याय और अंधकार के खिलाफ लड़ाई केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक भी है जब तक हम अपने भीतर की शक्ति को पहचानते हैं तब तक तक हर चुनौती का समाधान
00:28:00 संभव है
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